वैदिक ज्योतिष शब्दकोश
वैदिक ज्योतिष में वक्री (रेट्रोग्रेड) का क्या अर्थ है?
Also known as: वक्री गति (रेट्रोग्रेड)
वक्री या रेट्रोग्रेड ग्रह पृथ्वी के दृष्टिकोण से पीछे की ओर गतिमान प्रतीत होता है। वैदिक ज्योतिष में वक्री ग्रहों को विशेष रूप से मजबूत माना जाता है और वे तीव्र, आंतरिक परिणाम देते हैं।
सूर्य और चंद्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु और केतु सदा वक्री रहते हैं। अन्य पाँच ग्रह समय-समय पर वक्री होते हैं।