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वैदिक ज्योतिष शब्दकोश

ज्योतिष में दशम भाव क्या दर्शाता है?

इन्हें भी कहते हैं: कर्म भाव, आजीविका का भाव

दशम भाव (कर्म भाव) आजीविका, व्यवसाय, सामाजिक प्रतिष्ठा, अधिकार तथा संसार में आपके दृश्य कर्मों का स्वामी है।

यह कुंडली का सर्वोच्च बिंदु है — सर्वाधिक सार्वजनिक केन्द्र — और व्यवसाय तथा कीर्ति के लिए इसकी राशि, स्थित ग्रह और स्वामी सर्वप्रथम देखे जाते हैं। सूर्य (प्रतिष्ठा), शनि (कर्म एवं परिश्रम), बुध और गुरु — सभी कार्य के भिन्न पक्षों के कारक हैं।

दशम में स्थित ग्रह पूर्ण सार्वजनिक दृष्टि में फल देते हैं। दशमेश की दशाएँ तथा दशम में गुरु या शनि का गोचर आजीविका के शास्त्रीय समय-संकेत हैं — ये सदैव सटीक जन्म-समय से गणना किए जाते हैं, क्योंकि दशम शीघ्र बदलता है।

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