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वैदिक ज्योतिष शब्दकोश

ज्योतिष में द्वितीय भाव क्या दर्शाता है?

इन्हें भी कहते हैं: धन भाव, संपत्ति का भाव

द्वितीय भाव (धन भाव) संचित धन, कुटुंब, वाणी, भोजन और मूल्यों का स्वामी है — अर्थात् आप क्या धारण करते हैं और स्वयं को कैसे व्यक्त करते हैं।

यह बचत और संपत्ति को दर्शाता है (एकादश भाव की आय से भिन्न), वह परिवार जिसमें आपका जन्म हुआ, आपकी वाणी की गुणवत्ता, और परंपरागत पाठों में मुख तथा नेत्र भी। धन के लिए गुरु इसका नैसर्गिक कारक है।

शास्त्रों में द्वितीय दो मारक भावों में से एक है, अतः इसके स्वामी की दशाओं को केवल 'धन की अवधि' न मानकर समय-निर्धारण में सावधानी से परखा जाता है।

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