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बारह भाव

तृतीय भाव

इन्हें भी कहते हैं: सहज भाव, पराक्रम का भाव

ज्योतिष में तृतीय भाव क्या दर्शाता है?

तृतीय भाव (सहज भाव) साहस, पहल, छोटे भाई-बहन, संवाद, कौशल और लघु यात्राओं का स्वामी है।

यह स्वयं के प्रयास का भाव है — हाथ, लेखन, संचार-माध्यम, अभिरुचियाँ और कार्य करने का दैनिक साहस। पराक्रम के कारक मंगल इसके नैसर्गिक कारक हैं।

उपचय भाव होने के कारण यहाँ स्थित ग्रह — नैसर्गिक पाप ग्रह भी — समय और परिश्रम के साथ फल में सुधार लाते हैं; इसीलिए खिलाड़ियों, लेखकों और उद्यमियों की कुंडली में बलवान तृतीय भाव सराहा जाता है।

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