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वैदिक ज्योतिष शब्दकोश

ज्योतिष में अष्टम भाव क्या दर्शाता है?

इन्हें भी कहते हैं: रंध्र भाव, आयु भाव, परिवर्तन का भाव

अष्टम भाव (रंध्र भाव) आयु, आकस्मिक घटनाओं, रूपांतरण, उत्तराधिकार, संयुक्त संपत्ति, शोध और गूढ़ विद्या का स्वामी है।

यह दुःस्थान भावों में सबसे गहन है — गुप्त का भाव: दूसरों का धन, बीमा और विरासत, संकट और पुनर्जन्म, तथा गूढ़ ज्ञान। आयु के कारक शनि इसके नैसर्गिक कारक हैं।

बलवान अष्टम भेदक शोध-क्षमता और उत्तराधिकार से अकस्मात् लाभ दे सकता है; पीड़ित होने पर आकस्मिक उथल-पुथल पढ़ी जाती है। कठिन कालखंडों के साढ़ेसाती-सदृश विश्लेषण में भी यह केंद्रीय है, किंतु सदैव संपूर्ण कुंडली के साथ ही आँका जाता है।

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