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सूर्य / नवम भाव / राहु

पितृ दोष

पितृ दोष पितृ कारक (सूर्य), पिता/धर्म/पितरों के नवम भाव, और पैतृक कर्म के चिह्न राहु से पढ़ा जाता है। यह पाठ लग्न से पूर्ण-राशि भावों का उपयोग करता है और ऑनलाइन ज्योतिष कैलकुलेटरों में सबसे आम योगों को चिह्नित करता है।

ज्योतिषी इसे एक ही स्थिति से नहीं, पूरी कुंडली से आँकते हैं; यहाँ की श्रेणी गिनती है कि सूचीबद्ध कारकों में से कितने मौजूद हैं।

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अपना परिणाम कैसे पढ़ें

कोई भी सूचीबद्ध कारक दोष को मौजूद बनाता है। एक कारक = कम; दो या अधिक = अधिक; कोई नहीं = पितृ दोष नहीं।

आम कारक: सूर्य का राहु या केतु से युति, नवम में छाया ग्रह या पाप ग्रह, नवमेश का राहु/केतु से युति, और नवमेश का दुष्ट भाव (6, 8 या 12) में होना।

गणना कैसे होती है

डी1 निरयन (लाहिरी) स्थितियों से गणित। भाव लग्न से पूर्ण-राशि हैं; युति का अर्थ एक ही राशि है। वही इंजन RishiAstro कुंडली चलाता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पितृ दोष क्या है?

यह पितरों से जुड़ी पीड़ा है, अक्सर सूर्य, नवम भाव या राहु–सूर्य योगों से पढ़ी जाती है, और अनसुलझे पैतृक कर्म से जोड़ी जाती है।

पितृ श्रेणी कैसे तय होती है?

कोई कारक नहीं तो दोष नहीं; ठीक एक सूचीबद्ध कारक कम; दो या अधिक अधिक।

क्या पितृ दोष के लिए जन्म समय ज़रूरी है?

हाँ — लग्न, नवम भाव और नवमेश सभी सही जन्म समय और स्थान पर निर्भर करते हैं।

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