बारह भाव
षष्ठ भाव
इन्हें भी कहते हैं: अरि भाव, रोग भाव, शत्रु का भाव
ज्योतिष में षष्ठ भाव क्या दर्शाता है?
षष्ठ भाव (अरि अथवा रोग भाव) शत्रु, रोग, ऋण, मुकदमे, प्रतिस्पर्धा तथा दैनिक सेवा या नौकरी का स्वामी है।
यह तीन दुःस्थान भावों में से एक है, किंतु उपचय भाव भी — ऐसा संघर्ष जो सबल बनाता है। यहाँ शुभ प्रभाव शत्रुओं पर विजय, रोग से उबरने और ऋण चुकाने की क्षमता दर्शाता है।
मंगल और शनि इसके नैसर्गिक कारक हैं (क्रमशः शत्रु और रोग)। आधुनिक पाठक षष्ठ से सेवा-व्यवसाय, स्वास्थ्य-कार्य और अनुशासित दिनचर्या भी देखते हैं।